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April 17, 2026
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मध्यप्रदेश

साइबर ठगों को रुपये ट्रांसफर करने के लिए फर्जी खाते खुलवाने वाला मैनेजर सहित दो गिरफ्तार

इंदौर। राज्य साइबर सेल ने साइबर ठगी के मामले में निजी बैंक के बिजनेस डेवलपमेंट मैनेजर और डिलीवरी ब्वाय को गिरफ्तार किया है। मैनेजर और उसके दो साथी दुबई माड्यूल को फर्जी बैंक खातों (करंट) की सप्लाई कर रहे थे। इन खातों में देश-विदेश में होने वाली साइबर ठगी का रुपया जमा हो रहा था। मैनेजर दो महीने में 35 खाते खुलवाना स्वीकार चुका है।

एसपी (साइबर) जितेंद्र सिंह के मुताबिक, उद्यमी धीरज जायसवाल द्वारा शिकायत दर्ज करवाई गई थी। धीरज के साथ शेयर ट्रेडिंग एप के माध्यम से 85 लाख 21 हजार रुपये की ठगी हुई थी। ठगी राशि आरके इंटरप्राइजेस के इंडसइंड बैंक के करंट खाते में जमा हुई थी। पुलिस ने बैंक से जानकारी ली और खाता संचालक राकेश त्रिपाठी को गिरफ्तार कर लिया।

मूलत: इकई बलरामपुर (उप्र) निवासी राकेश सुखलिया में रहता है और डिलीवरी ब्वाय का काम करता है। उसने बताया कि खाता इंडसइंड बैंक के डेवलपमेंट मैनेजर मोहम्मद जाबाज कुरैशी ने खुलवाया है। सोमवार को पुलिस ने कुरैशी को भी गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में खुलासा हुआ कि उसका संपर्क बैंक के दो अन्य कर्मचारियों संदीप और हितेश से है, जो दुबई माड्यूल के सदस्य हैं।

टेलीग्राम चैनल से जुड़े संदीप और हितेश ने ठग के इशारे पर फर्जी खाते खुलवाकर एटीएम, चेक, पासबुक आदि भिजवाई है। एक खाते के बदले 12 से 15 लाख रुपये फीस मिलती थी। इन खातों का दो-तीन महीने तक इस्तेमाल किया जाता था।

पुलिस को जानकारी मिली है कि आरके इंटरप्राइजेस के खाते में दो माह के अंदर छह करोड़ 18 लाख रुपये जमा हुए हैं। एक अन्य फर्म गढ़वाल इंटरप्राइजेस के नाम से खोले खाते में भी दो माह में सात करोड़ 50 लाख रुपये का ट्रांजेक्शन हुआ है। पुलिस अब बैंककर्मी संदीप और हितेश को ढूंढ रही है।

 

फर्जी केवायसी-गुमाश्ता से खुलवाए करंट खाते

 

 

 

एसपी के मुताबिक, यशवंत मार्ग मेला रोड़ महिदपुर निवासी जाबाज कुरैशी सियागंज स्थित इंडसइंड बैंक में पदस्थ है और फिलहाल देवसाया अपार्टमेंट स्नेहलतागंज में रहता है। उसने पूछताछ में 35 खाते खुलवाना स्वीकारा है। आरोपित ने करंट खाता खुलवाने के लिए राकेश त्रिपाठी के नाम से फर्म बनाई और फर्जी गुमाश्ता अनुज्ञा, आइडी का इस्तेमाल किया। इसमें वह बल्क अपलोड और कार्पोरेट आइडी की सुविधा भी रखता था। आरोपित फोन पे, ई-वालेट और बल्क अपलोड के माध्यम से मिनटों में रुपये अन्य खातों में ट्रांसफर कर लेते।

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