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September 1, 2026
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कांग्रेस से एक और मुद्दा हथियाने की तैयारी में बीजेपी, ‘संविधान हत्या दिवस’ मनाने की इनसाइड स्टोरी

आपातकाल की बरसी पर अमित शाह की संविधान हत्या दिवस मनाने की घोषणा ने सियासी पारा चढ़ा दिया है. कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए इसे सुर्खियां बटोरने वाला फैसला बताया है. कांग्रेस के आरोप से इतर लोकसभा चुनाव के बाद जिस तरह से बीजेपी आपातकाल के मुद्दे को उठा रही है, उससे अलग ही समीकरण बनने के संकेत मिल रहे हैं.

कहा जा रहा है कि बीजेपी संविधान हत्या दिवस के जरिए कांग्रेस से संविधान का मुद्दा हथियाना चाहती है. हालिया लोकसभा चुनाव में इस मुद्दे ने कांग्रेस की सीट बढ़ाने में बड़ी मदद की थी. हालांकि, यह पहली बार नहीं है जब बीजेपी कोई मुद्दा कांग्रेस से छीनने की कोशिश कर रही है. पार्टी पहले भी कांग्रेस से एक मुद्दा छीनकर उसे झटका दे चुकी है.

कांग्रेस से छीन ली थी गारंटी

भारत के चुनाव में आमतौर पर वादा का जिक्र होता रहा है, लेकिन 2022 के हिमाचल चुनाव में कांग्रेस ने गारंटी शब्द का जिक्र किया था. पार्टी के बड़े नेता पूरे चुनाव में कांग्रेस की गारंटी का प्रचार करते रहे. पार्टी को इसका फायदा भी मिला और सीधे मुकाबले में बीजेपी को हराकर सरकार बनाने में कामयाब हो गई.

हिमाचल की हार ने बीजेपी को बड़ा झटका दिया था. इसकी 2 बड़ी वजह थी- पहली, इस हार के कारण गुजरात की प्रचंड जीत फिकी पड़ गई. दूसरी वजह राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा थी. बीजेपी ने समीक्षा के बाद कांग्रेस की गारंटी शब्द को छीनने की कवायद में जुट गई.

बीजेपी ने पहले 3 राज्यों के विधानसभा चुनाव और फिर लोकसभा चुनाव में मोदी की गारंटी नाम से कैंपेन की शुरुआत की. खुद प्रधानमंत्री लोगों से वादों की गारंटी देते थे. मोदी की गारंटी हिंदी पट्टी में बीजेपी के लिए हिट साबित हुआ.

2024 के चुनाव में तो कांग्रेस को अपने गारंटी वाले कैंपेन में बदलाव करने पड़े. पार्टी ने 2024 के कैंपेन गारंटी की शुरुआत में न्याय शब्द जोड़ा और न्याय के साथ गारंटी अभियान चलाया.

अब बीजेपी की नजर संविधान पर

2024 के चुनाव में संविधान एक बड़ा मुद्दा था. इंडिया गठबंधन के बड़े नेता संविधान को लेकर अपनी हर रैली में जाते थे और बीजेपी पर इसे खत्म करने का आरोप लगाते थे. बीजेपी ने इसके काउंटर की कई कोशिशें की, लेकिन पार्टी सफल नहीं हो पाई. इसका असर नतीजों पर भी देखने को मिला.

2024 के चुनाव में बीजेपी के हाथों से दलित वोट खिसक गई. इसका नुकसान पार्टी को हरियाणा, महाराष्ट्र, यूपी, राजस्थान और पंजाब में हुआ. इन राज्यों में हार की वजह से पार्टी अकेले दम पर बहुमत का आंकड़ा भी नहीं छू पाई. इसके बाद बीजेपी ने हार की समीक्षा शुरू की.

समीक्षा में अधिकांश नेताओं का कहना था कि संविधान का मुद्दा हम पर भारी पड़ गया. चाहकर भी इसका काउंटर नहीं कर पाए. तब से ही बीजेपी इस मुद्दे को विपक्ष से छीनने की कोशिशों में जुटी हुई है. बीजेपी के लिए आपातकाल का दिन यानी 25 जून एक बड़ा मौका है.

हाल ही में लोकसभा स्पीकर ने सदन में आपातकाल के खिलाफ प्रस्ताव पढ़ा था, जिसका विरोध कांग्रेस ने किया था. अब केंद्र सरकार ने आपातकाल के दिन यानी 25 जून को संविधान हत्या दिवस मनाने का ऐलान किया है. इसके जरिए बीजेपी की सरकार एक तीर से 2 निशाना साधना चाहती है.

1. आपातकाल का मामला उठाकर बीजेपी की सरकार कांग्रेस को बैकफुट पर धकेलना चाहती है. पार्टी की कोशिश गारंटी की तरह ही यह मुद्दा कांग्रेस से छीनने की है.

2. आने वाले दिनों में हरियाणा, महाराष्ट्र, झारखंड और बिहार में विधानसभा के चुनाव होने हैं. इन राज्यों में दलितों की आबादी 20-25 प्रतिशत के बीच है, जो सरकार बनाने और बिगाड़ने में बड़ी भूमिका निभाते हैं.

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