August 25, 2026
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धर्म

इस शक्तिपीठ में गिरी थीं अमृत की बूंदें, सात नाग करते हैं देवी की रक्षा

हिंदू धर्म में बहुत से देवी देवताओं की पूजा अर्चना की जाती है. सभी देवी देवताओं का अपना विशेष महत्व है. उसी प्रकार लोग मनसा देवी की भी बहुत ही श्रद्धा भक्ति से पूजा अर्चना करते हैं. पंचकूला में स्थित माता मनसा देवी का मंदिर 51 शक्तिपीठों में से एक है.

मनसा देवी शक्तिपीठ, हरिद्वार

हरिद्वार से करीब तीन किलोमीटर की दूरी पर शिवालिक पहाड़ियों के बिलवा पहाड़ में मां मनसा देवी का प्रसिद्ध मंदिर है. यह अपने आप में ही इतिहास समेटे हुए प्राचीन मंदिर खास है. क्योंकि ये वही स्थान है जहां माता का मस्तिष्क गिरा था. मान्यता है कि जो भी सच्चे मन से माता के दरबार में पहुंचता है, माता उसकी मनोकामना को जरूर पूरा करती हैं.

समुद्र मंथन में गिरी अमृत की बूंदे

हरिद्वार का मंसा देवी मंदिर उन चार स्थानों में से एक है जहां अमृत की बूंदे गिरी थी. हरिद्वार के अलावा उज्जैन , नासिक और प्रयाग वह स्थान है जहां अमृत की बूंदें गिरी थी. पौराणिक कथा के अनुसार, अमरता का अमृत, आकाशीय पक्षी द्वारा ले जाते समय गलती से एक कुंभ से गिर गई थी.

रक्षा में तत्पर हैं सात नाग

मंसा देवी सर्प और कमल पर विराजमान होती हैं. सर्प पर विराजित होने के कारण इन्हें सर्पों की देवी भी कहा जाता है. मान्यता है कि 7 नाग माता की रक्षा में हमेशा ही विद्यमान होते हैं. लोक कथाओं के अनुसार सर्पदंश के इलाज के लिए भी लोग मां मनसा की उपासना करते है. माता की गोद में उनका पुत्र आस्तिक विराजमान है. बताया जाता है मनसा का एक नाम वासुकी भी है.

डोरी बांधने की है परंपरा

मनसा देवी के नाम का अर्थ होता है इच्छा पूर्ण करने वाली. मनसा देवी के दर्शन करने बहुत से भक्त रोजाना आते रहते हैं. मंदिर परिसर में मौजूद स्नोही वृक्ष पर डोरी बांधने की भी परंपरा चली आ रही है. जो व्यक्ति इस मंदिर में आता है, वह अपनी मनोकामना पूरी करने के लिए मंदिर परिसर स्थित पेड़ की डालियों में धागा बांधता है. एक बार जब उनकी मनोकामना पूरी हो जाती है तो लोग पेड़ से धागा खोलने के लिए दोबारा इस मंदिर में आते हैं.

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