22.2 C
Dehradun, IN
September 2, 2026
Home | Uttarakhand Loksabha Local and National News in Hindi
देश

CBI का होता है दुरुपयोग… केंद्र के खिलाफ पश्चिम बंगाल की याचिका, SC में होगी सुनवाई

सीबीआई के कथित दुरुपयोग को लेकर केंद्र सरकार के खिलाफ दायर पश्चिम बंगाल सरकार की याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई योग्य माना है. वहीं, केंद्र सरकार की दलील को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है. इस मामले पर जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने फैसला सुनाया है. पश्चिम बंगाल सरकार का आरोप है कि राज्य के अधीन आने वाले मामलों में एक तरफा रूप से सीबीआई को भेजकर केंद्र सरकार हस्तक्षेप करती है.

बंगाल सरकार ने संविधान के अनुच्छेद 131 के तहत केंद्र के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है. सुप्रीम कोर्ट सीबीआई के राज्य में जांच के अधिकार क्षेत्र की समीक्षा करेगा. शीर्ष अदालत बंगाल सरकार की याचिका पर मेरिट के आधार पर आगे सुनवाई करेगी. वह 13 अगस्त को यह तय करेगी कि किन-किन मुद्दों पर सुनवाई की जाए. इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट सितंबर में अगली सुनवाई करेगा.

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से पूछा था ये सवाल?

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार के उस दावे को स्वीकार करने से इनकार कर दिया था कि उसका सीबीआई पर कोई नियंत्रण नहीं है. कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा था कि राज्यों के अंदर मामलों की जांच के लिए सीबीआई को कौन भेजता है? पश्चिम बंगाल सरकार ने कोर्ट से कहा था कि उसने नवंबर, 2018 में दिल्ली स्पेशल पुलिस इस्टैब्लिशमेंट एक्ट, 1946 की धारा 6 के तहत अपने क्षेत्र में अंदर सीबीआई जांच के लिए अपनी सहमति वापस ले ली थी.

राज्य का कहना है कि सहमति वापस लेने के बाद भी केंद्र सरकार सीबीआई को जांच के लिए राज्य में भेज रही है. पश्चिम बंगाल में सीबीआई ने 15 से ज्यादा मामले दर्ज किए हैं. सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा था कि यह मुकदमा चलने के काबिल नहीं है और इसे शुरू में ही खारिज कर दिया जाना चाहिए. याचिकाकर्ताओं का सीबीआई को केंद्र की पुलिस फोर्स कहना गलत था. सीबीआई कहां और कैसे जांच करती है, उसमें केंद्र की कोई भूमिका नहीं है.

सुप्रीम कोर्ट ने किया था डीएसपीई अधिनियम की इस धारा का जिक्र

जस्टिस मेहता ने डीएसपीई अधिनियम की धारा 5(1) का जिक्र किया था जो केंद्रीय जांच एजेंसी को नियंत्रित करती है. अधिनियम की धारा 5(1) केंद्र सरकार को यह शक्ति देती है कि वह केंद्र शासित प्रदेशों को छोड़कर राज्यों में सीबीआई को जांच के लिए आदेश पारित कर सकती है. जस्टिस ने तुषार मेहता से पूछा था कि अगर आपका कहना सही है तो धारा 5(1) में केंद्र सरकार को डीएसपीई के तहत सीबीआई की शक्तियों और अधिकार क्षेत्र को परिभाषित करने का अधिकार क्यों देती है? मेहता ने कोर्ट से कहा था कि मुकदमे में सीबीआई को प्रतिवादी बनाने के लिए संशोधन नहीं किया जा सकता है, क्योंकि यह अनुच्छेद 131 के तहत एक राज्य नही है.

Related posts

संगठन से सत्ता तक OBC को तरजीह… लोकसभा की हार का हिसाब बराबर करने में जुटी BJP

Uttarakhand Loksabha

जेपी नड्डा की बढ़ेगी जिम्मेदारी, बन सकते हैं राज्यसभा में सदन के नेता

Uttarakhand Loksabha

उत्तराखंड में भाजपा के सबसे लंबे कार्यकाल वाले मुख्यमंत्री बने धामी, रचा इतिहास

Uttarakhand Loksabha