कांवड़ रूटों की दुकानों पर मालिकों का नाम लिखना जरूरी, कितना सही कितना गलत, क्या कहता है कानून?
किसी ने क्या खूब लिखा है कि ‘वो ताजा-दम हैं नए करामात दिखाते हुए, आवाम थकने लगी तालियां बजाते हुए’. इसका निहितार्थ भारत में लोकतंत्र स्थापित होने से पहले राजा-महाराजाओं के समय में आवाम (आम जनता) के हालात की अवधारणा को दिखाता है. आज के दौर में ऐसा नहीं हो सकता कि सरकार कोई काम करे और सभी के लिए तालियां बजानी जरूरी हो, शायद यही वजह है कि कांवड़ यात्रा के दौरान कानून-व्यवस्था को कायम रखने के लिए यूपी सरकार के नेम-प्लेट नियम को लेकर देशभर में तीखी बहस छिड़ी हुई है. संविधान और कानून की निगाह से देखा […]...

