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October 17, 2026
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मध्यप्रदेश

रेलवे के टावर वैगन ड्राइवर को गुड्स ड्रायवर के समान मिलेगा रनिंग एलाउंस, सुप्रीम कोर्ट ने लगाई मध्‍य प्रदेश हाई कोर्ट के आदेश पर मुहर

जबलपुर। सुप्रीम कोर्ट ने मध्‍य प्रदेश हाई कोर्ट के उस आदेश पर मुहर लगा दी, जिसके तहत टावर वैगन ड्राइवर को गुड्स ड्राइवर के समान रनिंग एलाउंस देने के निर्देश दिए गए थे। सुप्रीम कोर्ट ने रेलवे द्वारा हाई कोर्ट के आदेश के विरुद्ध विशेष अनुमति याचिका दायर की थी। सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति हिमा कोहली व न्यायमूर्ति संदीप मेहता की युगलपीठ ने हाई कोर्ट के पूर्व आदेश को सही निरूपित किया।

भोपाल निवासी पीएन विश्वकर्मा, करण सिंह, हरि सिंह व तेजराम की ओर से अधिवक्ता वृन्दावन तिवारी ने पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि याचिकाकर्ता पश्चिम मध्य रेल जोन के भोपाल डिवीजन में टावर वैगन ड्राइवर के पद पर कार्यरत हैं। ये ड्राइवर गुड्स ड्राइवर के समकक्ष रनिंग एलाउंस पाने के हकदार हैं।

इस लाभ से वंचित होने पर पहले केन्द्रीय प्रशासनिक अधिकरण में याचिका दायर की गई। कैट द्वारा याचिका निरस्त करने पर 2018 में हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई थी। याचिकाकर्ताओं को जब पदोन्नति दी गई तो उनकी पोस्ट टवर वैगन कम वीकल ड्राइवर कर दी गई।

ऐसा जानबूझकर किया गया ताकि इन्हें रनिंग एलाउंस नहीं देना पड़े। हाई कोर्ट में मामले की सुनवाई के दौरान रेलवे से पूछा था कि क्या कोई ऐसा पद होता है। रेलवे ने भी इससे इनकार किया था। हाई कोर्ट ने पाया कि ऐसा कोई पद है ही नहीं।

हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि याचिकाकर्ता व उनके जैसे अन्य कर्मचारियों को टावर वैगन ड्राइवर के पद से जाना जाए और उसके अनुसार रनिंग एलाउंस के साथ-साथ अन्य अनुषांगिक लाभ भी दिए जाएं। हाई कोर्ट के इस आदेश के विरुद्ध रेलवे ने सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दायर की जिस पर हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।

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