Category : धर्म
सावन का दूसरा मंगला गौरी व्रत, जानें पूजा विधि, मुहूर्त और मंत्र जाप
वैसे तो सावन का महीन भगवान शिव को प्रिय है. इस दौरान श्रद्धा भाव से पूजा अर्चना करने से व्यक्ति को भोलनाथ की विशेष कृपा प्राप्त होती है. सावन में सिर्फ शिवजी की नहीं बल्कि मां पार्वती की भी पूजा की जाती है. सावन महीन के हर मंगलवार को किए जाने वाला मंगलागौरी व्रत मां पार्वती को समर्पित हैं. मान्यता है कि यह व्रत महिलाएं आपने पति की लंबी आयु के लिए किया जाता है. सावन के दूसरे मंगला गौरी व्रत पर मां गौरी की विधिपूर्वक पूजा अर्चना और व्रत का पालन करने से अंखड सौभाग्य की प्राप्ति होती है. […]...
इस व्रत कथा के बिना अधूरी है हरियाली तीज की पूजा, विवाह में आती हैं अड़चनें!
हिन्दू धर्म में सावन माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि के दिन हरियाली तीज का पर्व बड़े ही उत्साह से मनाया जाता है. इसे हरियाली तीज और हरतालिका तीज के नाम से भी जाना जाता है. वहीं इस साल ये व्रत दिनांक 7 अगस्त को रखा जाएगा. इस दिन सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु के लिए निर्जला व्रत रखती हैं. हरियाली तीज के दिन भगवान शिव और मां पार्वती की विशेष रूप से पूजा-अर्चना की जाती है. यह व्रत सुहागिन महिलाओं के अलावा कुंवारी लड़कियां भी अच्छे वर की प्राप्ति के लिए व्रत रखती हैं. इस दिन […]...
सावन में किसी भी रात कर लें इनमें से कोई भी उपाय, कभी नहीं होगी पैसों की कमी!
भगवान भोलेनाथ का प्रिय महीना सावन इस बार 22 जुलाई से शुरू हो चुका है और इसका अब समापन 19 अगस्त 2024 को होगा. इस महीने में सभी शिव भक्ति में लीन रहते हैं. सावन में हर तरफ भगवान शिव से जुड़े कार्यक्रम होते दिखते हैं, लोग भजन करते हैं, भंडारे होते हैं जिससे इस महीने में उत्सव जैसा माहौल देखने को मिलता है. भगवान शिव को प्रसन्न करने और उनकी कृपा पाने के यह महीने बेहद विशेष माना जाता है. इस महीने में लोग कई उपाय भी करते हैं क्योंकि सावन का पूरा महीना कुछ विशेष उपायों के लिए […]...
लेफ्ट या राइट, नंदी के किस कान में बोलने से पूरी होती है इच्छा? जानें बोलने का सही तरीका
हिंदू धर्म में, भगवान शिव के वाहन नंदी का भी बहुत महत्व माना जाता है. सभी शिव मंदिरों में प्रवेश करते ही, नंदी जी की मूर्ति, शिव की ओर मुख किए हुए मिलती है. नंदी को शिव का प्रिय गण माना जाता है, जो सदैव उनकी सेवा में तत्पर रहते हैं. मान्यता है कि नंदी जी, भगवान शिव के द्वारपाल के सेवक के रूप में भगवान शिव की सेवा करते हैं. ये भी मान्यता है कि नंदी के कान में अपनी मनोकामना कहने से, वह सीधे भगवान शिव तक पहुंचती है. भगवान शिव, नंदी के प्रति अत्यंत प्रेम रखते हैं […]...
सावन कालाष्टमी पर बन रहे कई शुभ योग, भर जाएगा घर का खजाना, करना होगा ये काम
हिंदू धर्म में मासिक कालाष्टमी का बहुत धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व माना जाता है. यह पर्व भगवान काल भैरव की कृपा प्राप्त करने का सबसे अच्छा अवसर होता है. धार्मिक मान्यता है कि इस शुभ दिन काल भैरव की पूजा-पाठ करने से जीवन में चल रही परेशानियों से निजात मिलती है. इस दिन को कालाष्टमी इसलिए कहते हैं क्योंकि इस तिथि के दिन भगवान काल भैरव प्रकट हुए थे. यह शुभ तिथि भगवान भैरव से असीम शक्ति प्राप्त करने की तिथि मानी जाती है. इसलिए इस दिन पूजा और व्रत करने का विशेष महत्व माना गया है. इस कालाष्टमी पर […]...
भोलेनाथ का वो मंत्र, जिसके जाप से हर मुसीबतों से मिल जाता है छुटकारा!
हिन्दू धर्म में भगवान शिव को औढरदानी के नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि वे अपने भक्तों की पूजा से जल्द प्रसन्न होकर उनकी सभी मनोकामना को जल्द ही पूरा कर देते हैं. भगवान शिव की भक्ति करने पर लोगों को करियर, कारोबार और निजी जीवन में हर सुख और सफलता प्राप्त होती है. इसके अलावा महादेव की कृपा से घर में भी सुख-समृद्धि बनी रहती है. शिव पुराण के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति सावन के महीने में शिवलिंग की महिमा गान करने वाले लिंगाष्टकम् मंत्र को किसी शिवालय में जाकर शिवलिंग पर बेलपत्र या शमीपत्र चढ़ाते हुए करता […]...
अपनी ही बारात में दिगंबर पहुंचे शिव, आगे निकले देवता तो भोलेनाथ ने ऐसे बुलाए ‘खास बाराती’
सावन के महीने में भोलेनाथ की चर्चा हो तो उनके विवाह का प्रसंग जरूर आता है. दरअसल ब्रह्मा की सृष्टि में ऐसा विवाह ना तो कभी हुआ और न ही कभी होगा. इस विवाह में दूल्हे का स्वरुप तो अनूठा था ही, बाराती भी एक से बढ़कर एक थे. दूल्हा बने बाबा खुद नंदी पर सवार होकर दिगंबर अवस्था में ही ससुराल पहुंचे. उनके साथ चल रहे बाराती भी किसी सभ्य समाज के लोग नहीं थे, बल्कि सभी के सभी उनके अपने गण थे. जैसे ही यह बारात राजा हिमाचल के जनवासे में पहुंची, बारात देखने आए लोगों की हालात […]...
भगवान शिव ने पहली बार सुनाई थी सत्यनारायण कथा, कौन-कौन था श्रोता?
सनातन धर्म को मानने वाले लोगों के घरों में समय-समय पर सत्य नारायण भगवान की कथा तो होती ही होगी. क्या आप जानते हैं कि सत्य नारायण भगवान की पहली कथा कब और कहां हुई थी? इस कथा को सबसे पहले किसने कहा था और किसने सुना था? यदि नहीं, तो शास्त्रों के हवाले से यहां हम आपको बताने जा रहे हैं. श्रीमद भागवत महापुराण और स्कंद पुराण के मुताबिक भगवान शिव इस कथा को सबसे पहले कहा था. इन दोनों ही ग्रंथों में माता पार्वती को पहली श्रोता का दर्जा हासिल है. इन दोनों ही ग्रंथों में बार-बार यह […]...
भगवान शिव किसकी तपस्या में रहते हैं लीन, कौन हैं महादेव के आराध्य?
भगवान शिव हिंदू धर्म के सबसे महत्वपूर्ण और पूजनीय देवताओं में से एक माने जाते हैं. ये सभी देवों में सर्वश्रेष्ठ माने जाते हैं, इसलिए ही भगवान शिव को देवाधिदेव महादेव भी कहा जाता है. भोलेनाथ अनादि, अनंत, और स्वयंभू हैं. भगवान शिव जब सभी देवताओं में श्रेष्ठ हैं तो मन में जिज्ञासा उठती है कि उनके माता पिता कौन हैं? क्योंकि भगवान शिव के माता पिता को लेकर ज्यादातर भक्तजन अंजान हैं. श्रीमद् देवी भागवत पुराण में भगवान शिव के जन्म से जुड़ी कथा का जिक्र किया गया है. कुछ और धार्मिक ग्रंथों में भी भगवान शिव के जन्म […]...
भोले नाथ क्यों धारण करते हैं त्रिशूल और डमरू? मुट्ठी में समाया है संसार
भगवान शिव की जो अवधारणा हमारे दिमाग में है, उसमें वह हमेशा त्रिशूल धारण करते हैं और डमरू बजाते हैं. यह अवधारणा शिव पुराण और स्कंद पुराण में वर्णित विभिन्न प्रसंगों से बनी है. इन पुराणों में भगवान शिव के त्रिशूल और डमरू का विशेष महत्व बताया गया है. शिवपुराण के एक प्रसंग में त्रिशूल को कफ, वात और पित कहा गया है. कहा गया है कि त्रिशूल पर नियंत्रण हासिल करने के बाद व्यक्ति को संसार की चिंता नहीं रहती. ऐसे व्यक्ति का मन विचलित नहीं होता और वह सहज समाधि का प्राप्त कर सकता है. शिवपुराण के ही […]...

