36.4 C
Dehradun, IN
April 18, 2026
Home | Uttarakhand Loksabha Local and National News in Hindi
व्यापार

बजट में 5 किलो मुफ्त राशन की बढ़ी डेडलाइन, 3 चुनावी राज्यों के 1.5 करोड़ लाभार्थियों पर है नजर?

बजट 2024 की घोषणा करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण के तहत मिल रहे 5 किलो मुफ्त अनाज की डेडलाइन बढ़ाने की घोषणा की है. सीतारमण ने कहा है कि अब यह मुफ्त अनाज अगले 5 साल तक दिया जाएगा. मुफ्त अनाज को लेकर की गई इस घोषणा को हरियाणा, महाराष्ट्र और झारखंड के विधानसभा चुनाव से जोड़कर देखा जा रहा है.

इन तीनों ही राज्यों में अब से 3 महीने बाद विधानसभा के चुनाव प्रस्तावित हैं. 3 में से 2 राज्य (महाराष्ट्र और हरियाणा) में वर्तमान में बीजेपी गठबंधन की सरकार है, जबकि झारखंड में कांग्रेस गठबंधन की.

मुफ्त अनाज फिर से देने की घोषणा क्यों?

1. जिन राज्यों में चुनाव, वहां 35 लाख परिवार लाभार्थी

हर तीनों को अगर जोड़ दिया जाए तो यह 35 लाख से ज्यादा है.

अगर संख्या के हिसाब से लाभार्थियों की संख्या देखी जाए तो यह सीधे तौर पर 1.59 करोड़ के आसपास है. भारत सरकार के मुताबिक महाराष्ट्र में 1 करोड़ 10 लाख लोग मुफ्त राशन का लाभ लेते हैं. झारखंड में यह संख्या 34 लाख के आसपास है. वहीं हरियाणा में राशन का लाभ लेने वाले लोगों की संख्या करीब 12 लाख है.

2. यूपी से लेकर गुजरात तक बीजेपी को मिला फायदा

मुफ्त राशन का फायदा बीजेपी को कई राज्यों के विधानसभा चुनाव में मिला है. इनमें गुजरात और उत्तर प्रदेश का विधानसभा का चुनाव प्रमुख है. सीएसडीएस के मुताबिक गुजरात में मतदान कर निकले 10 में से 7 लोगों ने मुफ्त अनाज योजना का जिक्र किया. राज्य के इस चुनाव में बीजेपी ने एकतरफा जीत हासिल की थी.

उत्तर प्रदेश में भी भारतीय जनता पार्टी को मुफ्त अनाज स्कीम का फायदा मिला. सर्वे एजेंसी के मुताबिक हाल की लोकसभा चुनाव में 67 प्रतिशत लोगों का कहना था कि उनके परिवार को इस मुफ्त राशन योजना का लाभ मिला है.

मुफ्त अनाज स्कीम पर कितना खर्च करती है सरकार?

वित्त मंत्रालय के मुताबिक साल 2020 में इस स्कीम पर सबसे ज्यादा 5.41 लाख करोड़ रुपए खर्च किए गए थे. 2021 में यह आंकड़ा 2.92 लाख करोड़, 2022 में 2.72 लाख करोड़, 2023 में 2.12 लाख करोड़ और 2023 में 2.05 लाख करोड़ रुपए था.

केंद्र सरकार के मुताबिक इस स्कीम का लाभ पूरे देश में करीब 80 करोड़ लोगों का मिलता है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इसे बजट पर एक भार माना था और उनका कहना था कि करीब 10 लाख करोड़ रुपए एक पंचवर्षीय में इस पर खर्च होता है.

इतना ही नहीं कई मीडिया रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया था कि नीति आयोग ने इस स्कीम को बंद करने की सलाह दी थी. हालांकि, सरकार ने आयोग की इस सलाह को नहीं माना.

मुफ्त अनाज स्कीम फ्रीबीज के कारण भी विवादों में रही है. फ्रीबीज के दौरान सुप्रीम कोर्ट में जब सुनवाई हुई थी, तो पार्टियों की तरफ से दलील दी गई थी कि इस स्कीम पर भी विचार किया जाए. हालांकि, केंद्र का कहना था कि यह राहत के लिए है.

Related posts

बजट में लोगों की कमाई बढ़ाने पर सरकार दे ध्यान, ऑटो सेक्टर को डिमांड बढ़ने की है आस

Uttarakhand Loksabha

Semi Automatic या Fully Automatic, कौन सी Washing Machine लंबे समय तक देगी आपका साथ

Uttarakhand Loksabha

नहीं बिकेगा Haldiram’s, अटकलों पर लगा विराम, देश का आम आदमी बनेगा मालिक

Uttarakhand Loksabha