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April 17, 2026
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मध्यप्रदेश

लू की चपेट में मध्य प्रदेश ,भोपाल ,इंदौर समेत कई जिलों में पारा 45 के पार , गुना सबसे गर्म…

इन दिनों पूरा मध्य प्रदेश भीषण गर्मी की चपेट में है। पारा लगातार बढ़ता जा रहा है मौसम विभाग की माने तो गुरुवार को राजधानी भोपाल में इस सीजन का सबसे गर्म दिन रिकॉर्ड किया गया गुरुवार को भोपाल में पारा 44.5 डिग्री दर्ज किया गया। वहीं इंदौर में तापमान 45 डिग्री दर्ज किया गया। मौसम विभाग की माने तो अभी पूरे मध्य प्रदेश में हीट वेव का अलर्ट जारी किया गया है। जिसके चलते पूरा प्रदेश लू की चपेट में है। बात करें पूरे प्रदेश में सबसे गर्म शहर की तो गुरुवार को मध्य प्रदेश के गुना में सबसे ज्यादा 46 डिग्री पारा दर्ज किया गया है।

मौसम विभाग के अनुसार अगले 4 से 5 दिन प्रदेशवासियों को गर्मी से राहत मिलती दिखाई नहीं दे रही है। तापमान रिकार्ड स्तर पर दर्ज करने की आशंका भी जताई जा रही है। मौसम विभाग के मुताबिक प्रदेश के आठ शहरों का तापमान 45 डिग्री के पार रहा, जिसमें गुना प्रदेश का सबसे गर्म शहर रहा। वहीं ग्वालियर-चंबल की गर्मी मालवा-निमाड़ में शिफ्ट होती दिखाई दे रही है। जिसके चलते इंदौर, उज्जैन, खंडवा, शाजापुर भी भट्‌टी की तरह तप रहे हैं।

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भोपाल : लोकसभा में हार के बाद प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी अपने पद से इस्तीफा दे सकते हैं। वे दिल्ली में कांग्रेस की बैठक में शामिल होने पहुंचे हैं। इस्तीफे की बड़ी वजह कांग्रेस की आपसी कलह भी मानी जा रही है। दरअसल, 29 सीटों पर क्लीन बोल्ड होने के बाद जीतू पटवारी पर ही कांग्रेस नेताओं ने हार का ठीकरा फोड़ दिया। इस्तीफे की बड़ी वजह नाराजगी भी हो सकती है। लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने कांग्रेस को क्लीन बोल्ड कर दिया है। इस बड़ी हार के बाद फिर से संगठन को लेकर सवाल उठने शुरु हो गए हैं। इसी बीच कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने हार की पूरी जिम्मेदारी ली है। वहीं कांग्रेस नेता अजय सिंह राहुल ने अपने बयान में इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी को जिम्मेदारी लेने की बात कही है। अजय सिंह ने अपने बयान में यह भी दोहराया कि उनके नेता प्रतिपक्ष रहते 2013 के चुनाव में पार्टी हार गई थी तो जिम्मेदारी लेते हुए पद से इस्तीफा दे दिया था। दूसरी ओर सवाल उठ रहे हैं कि जीतू पटवारी इंदौर में कांग्रेस को उम्मीदवार विहीन होने से नहीं रोक पाए और अब उन्हीं के कार्यकाल में इंदौर में न केवल बीजेपी की सबसे बड़ी जीत हुई बल्कि प्रदेश से कांग्रेस की संसद में भागीदारी भी शून्य हो गई। ऐसे में आगे इंदौर से प्रदेश कांग्रेस में बड़े बदलाव की आवाज उठने लगी है। कांग्रेसी कार्यकर्ता पटवारी की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर रहे हैं। वहीं एक ही चुनाव में प्रदेश अध्यक्ष के रूप में जीतू पटवारी की इसे दूसरी बड़ी हार करार दिया है।

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