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April 17, 2026
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मध्यप्रदेश

युवा कांग्रेस में कार्यकारी अध्यक्ष की व्यवस्था होगी समाप्त, प्रकोष्ठ भी होंगे गठित

भोपाल। मध्य प्रदेश में युवा कांग्रेस बड़ा बदलाव करने जा रही है। जिला, विधानसभा और ब्लाक स्तर पर अब कार्यकारी अध्यक्ष की व्यवस्था अब नहीं रहेगी। पूर्णकालिक अध्यक्ष ही मनोनीत किए जाएंगे। यह व्यवस्था नाराज कार्यकर्ताओं को संतुष्ट करने और जो अध्यक्ष संगठन की कसौटी पर खरे नहीं उतरते थे, उनके विकल्प के तौर पर बनाई गई थी।

चूंकि, विधानसभा और लोकसभा चुनाव होने के बाद अब कोई चुनाव नहीं होना है, इसलिए संगठन को मजबूत बनाने की दिशा में काम किया जाएगा। प्रदेश कार्यकारिणी का गठन भी दो माह के भीतर करने की तैयारी है।

संगठन के लिए समय न निकाल पाने के कारण प्रदेश युवा कांग्रेस अध्यक्ष डा.विक्रांत भूरिया के स्थान पर मितेंद्र सिंह यादव को अध्यक्ष मनोनीत किया था। लोकसभा चुनाव के कारण यादव ने प्रदेश कार्यकारिणी भंग नहीं की पर अब नए सिरे से संगठन बनाने की तैयारी शुरू हो गई है।

बीते एक सप्ताह में प्रदेश पदाधिकारियों से लेकर जिला और विधानसभा अध्यक्षों से उन्होंने अलग-अलग भेंट की और संगठन में कसावट के लिए सुझाव मांगे। इसमें ही सुझाव आया कि नाराज कार्यकर्ताओं को मनाने के लिए कार्यकारी अध्यक्ष बना दिया गया था।

इसका उद्देश्य भले ही अच्छा रहा हो पर परिणाम कुछ भी नहीं आए। इसे देखते हुए तय किया गया कि कार्यकारी अध्यक्ष की व्यवस्था हर स्तर पर समाप्त कर दी जाएगी। जिन जिला और विधानसभा स्तरीय इकाइयों के अध्यक्षों की चुनावों में सक्रियता नहीं रही और संगठन द्वारा दिए गए लक्ष्यों की पूर्ति भी नहीं की, उन्हें हटा दिया जाएगा। इनके स्थान पर नए चेहरे आगे लाए जाएंगे। मीडिया से लेकर अन्य विभाग एवं प्रकोष्ठ गठित होंगे।

चुनाव कराने के लिए दबाव बनाएगा संगठन

 

संगठन कालेज और विश्वविद्यालय स्तर पर चुनाव कराने के लिए सरकार पर दबाव भी बनाएगा। प्रदेश में वर्ष 2017 के बाद से सरकार ने चुनाव नहीं कराए हैं। मुख्यमंत्री डा.मोहन यादव ने उच्च शिक्षा मंत्री रहते चुनाव कराने की घोषणा की थी। इसे उन्हें याद दिलाया जाएगा। विधानसभा के आगामी सत्र में भी इस विषय को उठवाया जाएगा।

 

हर स्तर पर होगा बदलाव

 

प्रदेश युवा कांग्रेस के अध्यक्ष मितेंद्र सिंह यादव का कहना है कि संगठन में हर स्तर पर बदलाव होगा। जो संगठन की मंशा के अनुरूप प्रदर्शन नहीं करेगा, वह पद पर भी नहीं रहेगा। कार्यकारी अध्यक्ष की व्यवस्था को समाप्त की जाएगी। नई टीम जल्द ही गठित की जाएगी। प्रदेश से लेकर विधानसभा स्तर तक नए पदाधिकारी मनोनीत किए जाएंगे।

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